बद चलन है ये इंसान,
मन मे छूरी पैनी धार,
पीठ दिखे तो करे हलाल |
अपना काम सुलभ हो जाय
चाहे औरों का हो सत्यानाश |
मीठी बातें तीखी सोच,
नजर मिलाकर करें बेहोश |
सच्चाई का नाटक खेले,
झूठ,कपट की माला फेरे |
लाख करो तुम अच्छे काम
एक गलत तो तोड़े पांव |
रिश्ते की क्या बात करूं
दुश्मन तीर-कमान चढ़े |
धन दौलत के चक्कर मे
भाई-भाई का नाता तोड़े
सात जन्म के चक्कर को
एक बरस में भूल गये |
ऐसे लोभी है इंसान
लोभी काया बड़ी महान
जो जीता इनको बना महान
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* मंशूभाई *


