आज केै गांव भईल गुलजार
मुर्गा औ मुर्गी सब भईल बेकार
लालटेन को एल.ईडी. ने मारा,
कैरोसीन को सरकार ने पी डाला
लब्दा,बोदा और पण्डोहा काव हैं,
सड़क,पक्की नाली कै फईल गै जाल
घर-घर में मोबाईल, घर-घर मे बिजली
जेका देखा बढ़-चढ़ कै करत थै जुगली
न रही अब मड़ईया, न रही वो चिड़़ईया
जब चलन रही गगरी,तब बनी रही नगरी
फगुआ हो या कजरी,छट्ठ हो या नाग पंचमी
न होत रहा ऐशन झगड़ा, न होत रहा रगड़ा
जबसे भईल गगरा, गांव मे शुरू होई गै झगड़ा
दिवाली हो या होली, चला थै धड़ा-धड़ गोली
जब से आईगै बाल्टी, गांव मे बन गै द्वि- पाल्टी
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*******{ मंशूभाई }*******


