यादों के सिलसिले बेशुमार चलते हैंराह-ऐ-इश्क़ में राही बार बार जलते हैंयूँ ही सवांर दी थी जुल्फ एक दफा उसकीफिर एक दफा को उसके गाल मचलते हैं!(राहीरमेश)