रग रग में है आंखो से नहीं छलकता

मेरा दर्द मुझसे बाहर नहीं निकलता



मेरी रूह मेरे जिस्म का सहारा नही लेती

मेरा वजूद तेरी कैद से बाहर नहीं निकलता



हकीकत है कि हकीकत में तू मेरा नही

दिल है के तेरे सपनो से बाहर नहीं निकलता



जलने वालो को जल ही जाना है जलने दो

पतंगा आग में गिरकर बाहर नहीं निकलता।

राहिरमेश