मैं तुम्हे एक परिंदा समझता रहा,

तुम तो पूरा आसमान निकले,


में तुम्हे सिर्फ एक गुत्थी समझता रहा,

तुम तो पूरा विज्ञान निकले,


मैने समेटा सारे रंगो को एक हथेली में,

तुम तो आए और तितली के जैसे ले उड़े उन रंगो को,


में तो तुम्हे एक सवाल समझता था,

तुम तो पूरा एक इम्तेहान निकले!!


~raahi_banjara