मैं चाहता हूँ,
जब उम्र का ये सूरज ढलने को हो,
और हाथ कांपने लगें ज़रा,
तब भी तुम्हारी साड़ी का वही छोर थामे रखूँ,
जो मेरे मन को रखे खुशियों से भरा।
लोग कहते हैं वक्त सब छीन लेता है,
पर मैं इसे एक चुनौती मानता हूँ,
क्योंकि मैं तुम्हारे साथ,
बस तुम्हारे साथ...
इत्मीनान से बूढ़ा होना चाहता हूँ।

