जीवन में जो खोया, जो पाया,
कुछ मिला कुछ अपनाया
वो सब मेरा करम,
हरदम जुदा रहा, उनसे यूंही भागा,
समझा नहीं किसी को
कभी कुछ कह नहीं पाया
ऐसी मेरी शरम,
मेरे अपने, मुझसे शुरु,
मुझ पर आश्रित
मेरा यह बड़ा भरम,
एक अलींगन उसका
बस यही सत्य,
करम शर्म भरम,
मृत्यु जीवन का सत्य।

