Poetry 1 min read 201.2K reads

मासूम शरारत


यूं देखते हो मुझे नजरअंदाज करके,शरारतें करते हो मासूम नादान बनके।

जानते हो बहुत कुछ, पर अनजान बनके,यूं रूठते हो मुझसे बेईमान बनके।

ढूंढते हो मुझे ख्वाबों में बेकरार बनके,पर निगाहें फेर लेते हो अहसान बनके।

Read more Earn more Learn more