ठीक है, कुछ मत कहो।

कभी-कभी मौन को भी सुना जाना चाहिए।

बस इतना जान लो कि,

मैं यहीं हूँ...

तुम्हारी इस खामोशी के साथ भी।

कोई बात नहीं,

ना ही कोई शिकायत है,

बातें तो दुनिया से भी होती हैं,

बस थोड़ा सूनापन महसूस हुआ तो कह दिया।

जब भी तुम्हारा मन करे कुछ कहने का,

मैं यहीं हूँ...

तुम्हारे पुराने शोर के लिए भी,

और इस नए मौन के लिए भी।

न समय की पाबंदी है,

न जवाब की शर्त,

बस एक उम्मीद है...

कि जब तुम्हारी चुप्पी टूटेगी,

मेरा नाम पुकारना हो,

मैं यहीं हूँ...