क्यों कुछ नदियाँ उस सागर से मिल नहीं पातीं,

जबकि समूचा सफर ही उस अंतहीन मिलन का था।

लगता है शायद साहिल ही इजाज़त नहीं देता उसे,

या फिर कुछ बंदिशें उसकी साथ छोड़ नहीं पातीं।


शायद वह डरती है, खुद को सागर में खो देने से,

अपनी पहचान, मीठापन खारे में गँवा देने से।

मिलन की उस पूर्णता में एक विराम भी तो छुपा है,

जैसे चांद का घटना या किसी,

अधूरी प्रेम कहानी का अमर होना।