तुम सा कहीं, कोई नहीं होता है,
आसमाँ-ज़मीन का नहीं, कहीं फ़र्क़ मिटता है?
कहने वाले बहुत, पर वफ़ा कम ही है,
दिल में तुम्हारी जगह, कोई और नहीं है।
नज़र से नज़र मिलते ही, ख़ामोशी बोल उठती है,
बिना शब्दों के भी बातें दिल से दिल तक चलती हैं,
उसका साथ चलना, है जैसे मौसमों का साथ होना,
नाम की उसके दुआ, हर शाम नया एक सवेरा बनती है।
