कुछ भी तो ना कहा था तुमने वो तो तुम्हारी आंखें थीं जिनकी बातों में आ गया था मैं" वो तुम्हारे गाल वो रेशमी बाल ही तो थे जिनका कायल हो गया था मैं पहलू में तुम्हारी जुल्फों से तुम्हारी खेलने की आदत ही तो थी जिसने दीवाना किया था मुझे काश की उन पलों में कभी कुछ कहा होता तुमने जाने से पहले एक बार लरजते होठों के शब्दों से दिल को छुआ होता मेरे कुछ भी तो ना कहा था तुमने!