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वक्त का दिया–दर्द !

R N ShuklaR N Shukla May 2, 2022
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समय बीत जाता है !
आदमी भी गुजर जाता है ! 
पर , समय का दिया घाव !
रिसता रहता है , सालता रहता है –
जीवन पर्यंत ! 

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