तुम कहाँ हो माँ !'s image
Poetry1 min read

तुम कहाँ हो माँ !

R N ShuklaR N Shukla May 7, 2022
Share0 Bookmarks 41508 Reads0 Likes
चलते - चलते ,

तुझे  ढूंढते-ढूंढते 


थक चुका हूँ  मैं !


तूने मुझे  जहाँ  फेंका  होगा 


उस  जगह  की  है  तलाश मुझे !


तुम कहाँ  हो  माँ ?


मैं  तेरे प्यार की 


बदनसीब   निशानी   हूँ 


एक बेनाम जीवित कहानी हूँ 


जानता  हूँ  मुझे  फेंकते हुए 


तू   बहुत   रोई   होगी !


न जाने कितने दिन-रात&nb

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts