भाई-भतीजावाद और –
भ्रष्ट्राचार के शिकार !
कवि ! लेखक ! साहित्यकार !
प्रशिक्षित–शिक्षक ! पत्रकार !
शिक्षक ! मजदूर ! किसान !
आदि ......आदि ......अनंत !
भ्रष्टाचार का नहीं है अन्त !
मूर्ख ! मालामाल !
बुद्धिजीवी बदहाल !
समझदार ,
लोकतंत्र के स्तंभकार ,
समाज के कर्णधार ,
दलालों के सामने –
कितने निरीह ! कितने लाचार ?
नौकरी ! किसे नहीं है प्यारी !
किंतु कभी नहीं आती इनकी बारी !
क्योंकि नहीं आती है इन्हें चाटुकारी !
पर , निभानी आती है इनको यारी !
हाय रे इनका दुर्भाग्य !
इनका भाग्य ! धन ! पद ! अन्न !
खा जाते भ्रष्टाचारी और अन्य !
भ्रष्टाचार के खिलाफ !
बोलते हैं ये जोरदार !
पर कोई नहीं सुनता
इनकी आवाज़ ! और–
कुछ भी नहीं निकलता
समाधान !
उन सबों के लिए –
ये – आवाजें !
बेकार की बातें !
लगता है –
भ्रष्टाचार की जड़ें –
बहुत गहरे तक गड़ी हैं !
इसी से बुलंद खड़ी हैं,अड़ी हैं !
कुछ नहीं सूझता उपाय !
क्या करें ? किससे कहें ?
कहाँ जाँय ?


