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बसेरा


उड़ना हो चाहेजितना ऊँचा उड़ लोनील गगन केउस अनन्त की सीमा छू लोविश्व भ्रमण चाहे जितना भी कर लोपर,ये मत भूलो –एक न एक दिन –सबको आना ही पड़ता हैइस 'भू' पर।

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