वो मेरा हाथ थाम लकीरें पढ़ता था,शायद उनमें खुद को ढूँढता था।और मैंने पढ़ी उसकी किताब सी आँखेंइतने दफे कि मुझे याद हो गयी हैं,सफ़्हा-दर-सफ़्हा,लफ़्ज़-दर-लफ़्ज़,हर्फ़-दर-हर्फ़।