बड़ महान मोर भारत भुइया जिहा भ्रष्टाचार मन पनपत हे।
भ्रष्टाचारी तड़ीपार है प्यादा मन सुल्ही में चढ़त हे।

भारत भूमि विश्व गुरू के सपना झन देखावव जी,
ज्ञान देवैया बुद्धि बताइए ला आइसन झेन तरसावव जी।।

रोवत हे दाई महतारी रोवत सब गरीब किसान मन
लडत हावय अपन हक के लड़ाई हमर युवा भाई मन

अन्याय होवत बाबा के भुइया मा हम अइसन दौर लाबो जी।
नेता बनही ias अफिसर नेता ला नौकर बनाबो जी।

धर्म धर्म के नारा जनता ला तुम लड़वाथो जी।
राम राज तुमन लाए हो, हम लंका जलाए बर आबो जी।।

✍️ प्रदीप कुमार