ये सुबह की ठंड
तन को सिकुडे सुभो शाम हे सूर्य देव प्राण।

निशा से जीवन का उजाला
देते शुभ शुभ नाम
जीवन का सूरज नया आया
लाया जीवन में जाम हे सूर्य देव प्रणाम।

ओस का चादर तुम ओढ़े तुम
लोगों को इठलाते हो
धीमे धीमे पग बढ़ते
पौधो को दे प्राण हे सूर्य देव प्रणाम।

कहते हैं गांवों की सुबह सुहानी
पड़ती प्रकृति की मस्त रवानी
रवि के संग संग मैं भी चलता
करता अपना काम हे सूर्य देव प्रणाम।

चिव चिव करता मुर्गियों चुजा।
कुत्ता करता है भौं।
चू चू करता चिड़ियों की टोली
लेते प्रभु का नाम हे सूर्य देव प्राण।