हो जाये !
हो जाये खता कोई !
तो माफ़ कर देना !
तुम ठहरी हकीम ए इश्क़ !!
और !
.....
मेरा तो इश्क़ भी अबोध है
~पुष्पेंद्र (रक्षत)


हो जाये !
हो जाये खता कोई !
तो माफ़ कर देना !
तुम ठहरी हकीम ए इश्क़ !!
और !
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मेरा तो इश्क़ भी अबोध है
~पुष्पेंद्र (रक्षत)