चमकते हैं जुगनू पल भर के तमस्विनी के आगमन पर "कितने नादान है महफिल के जुगनू कहते हैं l हम काफूर ए-सहर नहीं होने देंगे।
जुगनुओं ने मय का प्याला पिया,
"कहते है अब काफूर- ए- सहर बेमुरव्वत बता कर लगे कहकहाने ।
वो एहसान फरामोश जुगनू खुद को महान बताने की लगीं होड़।
तीरगी-ए-शब की अपनी ज़िद है जुगनुओं की अपनी ज़िदl
ठोकरों की अपनी ज़िद है हौसलों की अपनी ज़िद।रहज़नों की अपनी ज़िद है रहबरों की अपनी ज़िद l
DR Puspa sindhu

