खतों से मीलो करते सफर, जज्बात कभी " अब घंटो गुफ्तगू करने पर भी जज़्बात नही मिलते" जज़्बात झलकते आँखो से, जब शब्द पड़ जाते कम ।

क्या लिखूँ दिल-ए- जज़्बात जो कागज पर उतरते ही तितर - बितर हो चले ।। लिखता हूं मेरे जज्बात तेरा नाम लेकर " खो जाता हुं। तेरी दुनिया में""इलाज ए - इश्क में लुट गया" सब कुछ मिरा, चला पता इश्क -ए-मरज मर्ज का तीमारदारी -ला-इलाज है।