कोशिश बहुत कि मैं कामयाब ना हुआ

टुट कर खयाब सारे इस जमीं पर गिर पड़े।

फिर ख्वाबों के जहां में हम किनारे चल पड़े।

अब तो वफा-ए-इश्क में मेरी नब्ज थम गई,


अब तेरी यादों के पांव से चला नहीं जाता ।

और नियती करती है हार जीत का फैसला

मोहब्बत में सिक्के उछाल नहीं जाते।