इश्क बेवफा नहीं होता

आशिक बेवफा होता है ।

इश्क की इम्तिहाँ नहीं होती

इश्क सितम करवाता है ।

और हम इश्क में सहते- सहते

माणिक से पत्थर बन बैठे "

बेवफ़ाई के भी आदाब हुआ करते हैं "

तुम किसी के भी हो नहीं सकते

दिल कदमों में रख कर देख लिया ।

बेवफ़ाई फिदरत की तासीर तुम्हारी"

आदतन हमनें ऐतबार कर लिया ।

दिन रात जलता रहता हूं अजब चिराग हूं

मैं थक गया हूं हवा से कहो बुझाए मुझे ।

जो तेरे एक ख्वाहिश के लिए टूटें बार -बार ।