दर्द लेता है अब भी करवट जब कोई नहीं है पास दुखती पुरानी चोट है पर दबी रहती है मुंहमें आह बेसबब लगे ये बेक़रारी करती है परेशान जो हमें शिकवे करें तो किससे बची नहीं है कोई चाह!

Pushpesh Pant ji