बहुत ख़ुशनुमा थे वो पल
जो तुम्हारें साथ गुज़ारे थे
दोनों ही अधूरे से थे
दोनों ही सहारे थे
कभी मेरे नाम के
साथ उसका नाम था
यूँ कहो कि कभी वो हमारे थे
कशमकश से भरा
इश्क़ रहा मेरा
चमक थी मुझमें
लेकिन
लोग दाग लगाते रहे
उजाले बंद हुए मेरे
जलती बुझती सी शमा रही
मैं अमावस रहा
वो पूर्णिमा रही
रचना :Pushpendra Pal Singh
