भक्ति वह नहीं
जिसमें भाव की
या स्वभाव ज़रूरत हो
भक्ति से सिर्फ मानव निर्मित
ईश्वर को पाया जा सकता है
परमात्मा को पाना नहीं होता
क्यूँकी परमात्मा कोई चीज़ नहीं जिसको पाया जा सके
खुद को बस भूलना होता है
खुद को मिट्टी बनाना होता है
जो भाव विहीन हो सकता है
सिर्फ वही परमात्मा में लीन हो सकता है
रचना : पुष्पेन्द्र पाल सिंह
