फर्क़ क्या पड़ता है

की वो अच्छा है

या फिर बेकार हैं


माना कि हुस्न उसका

अव्वल है असरदार हैं


कैसे छोड़ दे कोई

माँ के पैरों की जन्नत

उस माँ से ही तो

मेरा किरदार है

रचना :

पुष्पेंद्र पाल सिंह