मतला मकता समझ ना आएजमाल उसका बताऊँ कैसेहर्फ़ कोई नज़र ना आएउसके नाम के हर्फ़ से भीखुश्बू आती हैं बे इन्तेहाइत्र मैं कौन सा लगा करमिलने जाऊँ समझ ना आएरचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह
मतला मकता समझ ना आएजमाल उसका बताऊँ कैसेहर्फ़ कोई नज़र ना आए
उसके नाम के हर्फ़ से भीखुश्बू आती हैं बे इन्तेहा
इत्र मैं कौन सा लगा करमिलने जाऊँ समझ ना आए
रचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह