मेहंदी काजल बिंदी
जिससे भी लो
उसका नाम

बस रस टपके..
चाहे हो
अरबी फ़ारसी
चाहे हो
उर्दू हिंदी

रुक जाए जाये
सारे लाव लश्कर
रुक जाए
हर रथी का रथ
जब देखे
उसकी नथ

पायल बिछिया
कंगन कमरबंद
सबसे उम्दा....
उसके बदन की सुगंध

सभी सोलह श्रृंगार
सब कुछ सब कुछ
जाता हूँ हार
हार जाता हूँ
मैं अपना दिल
जब भी देखता हूँ
उसके होठों का तिल...

Rachna : Pushpendra pal singh