हर्फ़ हूँ

मैं क़िताब होना चाहता हूँ


तुम ज़रा पलके बंद करो

मैं ख्वाब होना चाहता हूँ


बहुत हुई करवटें रात भर

ज़रा भोर हो तो

आफताब होना चाहता हूँ


उम्दा हो गया है इश्क़ मेरा “अब”

मै लाज़वाब होना चाहता हूँ


तुमको जो पा सकूँ

वो ख़िताब होना चाहता हूँ


रचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह