गुड़हल
ट्यूलिप
या फिर गुलाब दूं

ये छोटे छोटे
सितारे काफी होंगे
या फिर,
तोड़कर महताब दूं

तुम लिपट जाओ
खुद को समेट कर मुझे
ऐसी कौन सी तुम्हारी
नस दाब दूं

मेरे अगर
सपने नहीं आते तो
क्या खाक सोती हो

आओ तुम्हें
चिर योवन रस के ख्वाब दूं

Rachana :Pushpendra