फ़ूल जो
तेरे गजरे से गिरा था कल
अपने दिल की ज़मी में
इस कदर बोया हैं मैंने
पा तो कभी नहीं सका
तुम्हें ताउम्र बस खोया है मैंने
रचना :-पुष्पेंद्र पाल सिंह


फ़ूल जो
तेरे गजरे से गिरा था कल
अपने दिल की ज़मी में
इस कदर बोया हैं मैंने
पा तो कभी नहीं सका
तुम्हें ताउम्र बस खोया है मैंने
रचना :-पुष्पेंद्र पाल सिंह