Poetry 1 min read 754.2K reads

"फ़ूल जो"


फ़ूल जोतेरे गजरे से गिरा था कलअपने दिल की ज़मी मेंइस कदर बोया हैं मैंने

पा तो कभी नहीं सकातुम्हें ताउम्र बस खोया है मैंने

रचना :-पुष्पेंद्र पाल सिंह

Read more Earn more Learn more