एक “लोटा” इंसान
बिसात ही क्या रे बंदे तेरी
काहे तू खुद को माने भगवान
आता है रे रोते-रोते
जाता है तू रोते रोते
बीत जाएगा
जीवन तमाम
करले सुकर्म रे बंदे
लगा अपने
कुकर्म पर लगाम
आता है दो बालिस्त भर
इच्छाओं को तू
ना परवान चढ़ा
जाएगा भी
टुकड़ों में रे बंदे
है सिर्फ
तू एक "लोटा" भर इंसान


