डम डम डम डम डम डम
डम डम डम डम डम डम
डमड्डमड्डमड्डम डमड्डमड्डमड्डम
डमरू की डोर है

थिरक रहे नटराज
थरथराहट धरधराहट
धरधराहट थरथराहट
छायी हर ओर है

धरती अम्बर गगन गगन
बाजे है महेश धुन
मानस मगन मगन हर ओर है

रोम रोम रोम रोम रोम रोम रोम
है ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ है
रोम रोम रोम रोम रोम रोम रोम

विषाद तू
निषाद तू
हर कंठ का है वाद तू
सब ही तुझको जाने है
लेकिन तुझको जान कौन पाया है
है जानने का अपवाद तू

पुण्य तू
हर लेता सबके पाप तू
निवारक तू संहारक तू
करता हर पाप का विनाश तू......