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दफ़ाए जितनी


जितनी की है मैंनेतुझसे मोहब्बतकोई और कर ना सकेगा उतनी

आजमा लो…आजमा लो…एक दो तीन…चाहे दफ़ाए जितनी

जाना चाहती हो तोबेफिक्र जाओ

ख़ुदा भी तुम्हेंमेरा पता ना देगामै तेरे नाम कीरेखा भी मिटा दूँगाहथेली से अपनी

रचना:पुष्पेंद्र पाल सिंह

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