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छलावा


धर्म, मजहबजाति, पातीरिश्ते, नातेप्यार, दोस्ती

इनपर भी ध्यान दे लेनासब बाद में

पहले तुम्हारा जागृत होना अहम हैं

क्यूँकी तुम्हारें अलावासब कुछ है छलावा

— रचना :pushpendra
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