जब जीव संसारिक वस्तुओं को
खोजना बंद कर देता है
जब जीव स्वयं के अंदर ठहर जाता हैं
जब हम बाहर ना चलकर
स्वयं के अंदर चलते हैं
जब हम स्वयं को खो देते हैं
तब बोध अपनी पूर्णता पर होता है
इसी अवस्था को बुद्धत्व कहते हैं
और इसी की पूर्ण अवस्था को
अर्थात
पूर्ण रूप से बुद्धत्व प्राप्त करना ही वास्तविक बुद्ध पूर्णिमा हैं
जब जीव संसारिक वस्तुओं को
खोजना बंद कर देता है
जब जीव स्वयं के अंदर ठहर जाता हैं
रचना ::Pushpendra
