"बिवाई"
माना कि
माना……कि
बहुत
बहुत ऊचाई को छुआ है तुमने
लेकिन फ़ायदा क्या
जाने कितनों कि
गाढी कमाई हुआ छुआ है तुमने
ये जो कोट महँगा पहना हैं तुमने
ज़रूर……ज़रूर
गरीबों के चीथड़े से ही बुना है तुमने
बहुत उपदेश कटाक्ष ताने दिए हैं तुमने
क्या कभी किसी के
भूख से गड़गड़ाते पेट को सुना है तुमने
बहुत…..
बहुत छुआ होगा
हसीनों के गाल की गहराई को तुमने
क्या माँ के पैरों की बिवाई को छुआ है तुमने
माना……कि
बहुत
बहुत ऊचाई को छुआ है तुमने
क्या माँ के पैरों की बिवाई को छुआ है तुमने
बहुत बार बहुत ऊंची-ऊंची
उड़ानों की ऊँचाई को छुआ होगा तुमने
