ईश्वर को बेच देंगे ये

अल्लाह को बेच देंगे


बसायेंगे घर अमीरों के तो

गरीब की धरती को बेच देंगे


उड़ाना हो ग़र

आसमान मे अमीरों को तो

गरीबों के सर का आसमान बेच देंगे


बने हैं धर्म के ऐसे ठेकेदार ये

मंदिर के भगवान बेच देंगे


मिल जाए इन्हें अगर

भूखे की थाली मे निवाला कोई


ये उसके घर का

खाने का सामान बेच देंगे


माँ के आँचल से लिपटे

नवजात की किस्मत बेच देंगे


ये पूँजी का संसार हैं

ये बेटियों की अस्मत बेच देंगे


दिलों को बेच देंगे ये

देश की रीढ़ को बेच देंगे


अंधी हैं गूंगी हैं बहरी हैं वो

जो भीड़ इनके पीछे चलती हैं


मिलेगा जब ख़रीददार कोई

ये उस भीड़ को बेच देंगे


शीर्षक #बेच_देंगे

रचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह