घर उजाड़ देने है इन्हें
बस्तियाँ मिटा देनी हैं
इन पूँजी पिशाचों को
इंसानी हस्तियाँ मिटा देनी है
सब कुछ सब कुछ
सब कुछ मिटा सकते हो तुम
दिलों से प्यार नहीं मिटा सकते
दिलों से प्यार नहीं मिटा सकते
भारत माँ के वीर सपूतों का
भारत माँ के वीर सपूतों का
का ये संसार नहीं मिटा सकते
बात करते हो तुम
बात करते हो तुम
हिन्दू मुसलमा मिटाने की
ना तुम क़ुरान की
ना तुम क़ुरान की
एक आयत मिटा सकते हो
ना गीता का एक श्लोक मिटा सकते
रचना: पुष्पेंद्र पाल सिंह
रचना:पुष्पेंद्र पाल सिंह


