लिए इन भीगे नैनन में
पिया की उजली छाप,
बिरह की कारी रैना में
जिया रोशन उनके साथ
ज्यों चंदा और चकोरी
यों दिया संग बाती,
राधा का नंद का ग्वाला
और ब्रज की हर गोपी
ओ रे बदरा बावरे
क्या तुम आए परदेस से,
मोरे पी ने तुम्हरे हाथों
क्या भेजा कोई संदेस रे
ए चमक दमक ओ दामिनी
जिस गति से तू लहके रे,
मोरे साजन भयो बिदेसी
ऊंको लौट आवन को कहदे ले
बैरन बूंदा बरसन लागी जो
ऐसन धरती महकन लागी यों,
मोरा तन भीगा लट गीली
है मनवा फिर भी सूखा क्यों
दुश्मन लागे है जी को मोरे
ठंडे पानी की ये फुहार,
बिन पी के कछु भाए ना मोहे
कैसन सावन कैसी बहार
ये दिल काहे ना धीर धरे
आज कुछ ऐसन जागी प्यास,
अंग अंग मोरा अरज करे
ऐसी पिया मिलन की आस
लिए इन भीगे नैनन में
पिया की उजली छाप,
ओ काली कमली वाले सुनले
मोहे पिया मिलन की प्यास…
– पुष्पेंद्र राठी
