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कपाल


कपालकाल के कपाल परक्यों नाच रहे महादेवधरा को क्यों शमशानबना रहे जो दोषी हैंवे दंड के अधिकारी हैंनिर्दोषों को क्यों तुमकाल के गाल मेंसमा रहे माना कीतुम ईश हो, जगदीश होकाल हो, महाकाल होत्रिकाल भी तुम ही हो।

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