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प्रकृति


प्रकृति का,जीवन की प्रवृति के प्रति,

प्रेम, समर्पण, वात्सल्य तथा समवरण का, अनुसरण, एवम् अनुकरण कीजिए न ?शायद यही मानवता है ? जीवन का धर्म है।

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