मुझे एहसास हैदिल पर है मेरे, चोट सी गहरी,झलक तेरी,मेरे अरमानों तक आ कर नहीं ठहरी।ख़याओं, धड़कनों कोआज तक बेचैन करती है,कोई छुप जायेदिल ले कर मुहब्बत मैं नहीं ठहरी।
मुझे एहसास हैदिल पर है मेरे, चोट सी गहरी,झलक तेरी,मेरे अरमानों तक आ कर नहीं ठहरी।
ख़याओं, धड़कनों कोआज तक बेचैन करती है,कोई छुप जायेदिल ले कर मुहब्बत मैं नहीं ठहरी।