खुदा की खैर मेरी जिंदगानी हो गई है
मोहब्बत इस जमाने में कहानी हो गई है

वक्त तो हमसफ़र है हमनवां है
नसीबों से हमारी आनाकानी हो गई है

कहानी इश्क की अब क्या कहें हम
 गिले-शिकवों से भी ज्यादा पुरानी हो गई है

ये सोचा था खुदा तुझको मेरा कह दे जमाना
यह हसरत अब मेरी आंखों का पानी हो गई है

तेरी दुनिया तो तेरे पास है और चैन से है
इबादत और दुआ गम की निशानी हो गई है

मोहब्बत जिंदगी होती है पुष्कर को खबर है
नया है दौर ये दुनिया पुरानी हो गई है  

पुष्कर श्रीवास्तव