मांझी, अपने नसीब किनारे


देह नाव सी, जीवन सागर

अरमां तूफाँ सारे


कौन विधाता, मिलकर बिछड़े

अपने प्यारे प्यारे


आना जाना, जीना मरना

धारे और किनारे


मांझी, सपने नसीब हमार


- पुष्कर श्रीवास्तव "पुष्कर