यूंँ निगाहों से ऐसे न कहर कीजिए
करना है तो दिल में बसर कीजिए
अगर टूट भी गए तो संभल जायेंगे
बिखर जाएँ ऐसा न हशर कीजिए
वैसे शेर-ओ-शायरी बहुत करते हो
आज कुछ महबूब-ए-नजर कीजिए
नामांकित दिल का निशान बनाकर
नाम उसके भी कोई शजर कीजिए
मुद्दतों बाद वो आ रहे हमसे मिलने
आज रोशन दिल का शहर कीजिए
ख़्याल रखियेगा खुद से भी ज्यादा
'पुरु' उनसे मोहब्बत अगर कीजिए
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©पुरुषोत्तम


