जब भी तुम्हारी यादों का सैलाब आता है,बीते लम्हों में मुझे दुबारा बहा ले जाता है।मैं बेबस हो छोड़ देता हूंँ सबकुछ तुम पर,चलो देखता हूंँ मुझे और कितना डुबाता है।××ש पुरुषोत्तम
जब भी तुम्हारी यादों का सैलाब आता है,बीते लम्हों में मुझे दुबारा बहा ले जाता है।
मैं बेबस हो छोड़ देता हूंँ सबकुछ तुम पर,चलो देखता हूंँ मुझे और कितना डुबाता है।
××ש पुरुषोत्तम