Poetry 1 min read 780.4K reads

यादों का मलबा


मेरे ऊपर से अपनी यादों का मलबा हटाओ,हिमालय सा बोझ लेकर मैं जी नहीं पाऊंगा।

××שपुरुषोत्तम

Read more Earn more Learn more